भानुप्रतापपुर में 30 दिसंबर को बहुप्रतीक्षित ‘प्रीमियम वाइन शॉप’ का विधिवत शुभारंभ कर दिया गया। एक ओर जहाँ मदिरा प्रेमियों में गुणवत्तापूर्ण ब्रांड्स की उपलब्धता को लेकर उत्साह देखा जा रहा है,
वहीं दूसरी ओर दुकान के चयन स्थल को लेकर स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
राजस्व और अवैध बिक्री पर लगाम
आबकारी विभाग और शासन के दृष्टिकोण से यह कदम प्रदेश की नई आबकारी नीति का हिस्सा है। इस दुकान के संचालन के पीछे मुख्य उद्देश्य हैं:
- राजस्व में वृद्धि: प्रमुख शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्रीमियम आउटलेट्स के माध्यम से राज्य के खजाने को मजबूती देना।
- तस्करी पर रोक: अच्छी गुणवत्ता वाली शराब की आधिकारिक उपलब्धता सुनिश्चित कर अवैध शराब की कोचियाबाजी और तस्करी पर लगाम लगाना।
- बेहतर अनुभव: ग्राहकों को एक स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण में खरीदारी का विकल्प देना।
जन सरोकार: नियमों की अनदेखी का आरोप
दुकान के खुलते ही शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और अभिभावकों ने इसके स्थान पर आपत्ति जताई है। विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- शैक्षणिक संस्थान की निकटता: दुकान के ठीक पीछे सरस्वती शिशु मंदिर स्थित है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि जहाँ नन्हे बच्चे संस्कार और शिक्षा लेने आते हैं, वहां शराब दुकान का होना उनके मानसिक विकास और सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
- धार्मिक आस्था: दुकान के पास मंदिर स्थित होने के कारण श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचने की बात कही जा रही है।
- यातायात और सुरक्षा: स्टेट हाईवे के बिल्कुल सामने दुकान होने के कारण भविष्य में दुर्घटनाओं और यातायात बाधित होने का अंदेशा जताया जा रहा है।
- नियमों की वैधता: आरोप है कि विभाग ने तथ्यों को ओझल करते हुए नियमों को दरकिनार किया है, जिससे स्थानीय निवासियों में रोष व्याप्त है।
भानुप्रतापपुर की यह नई प्रीमियम दुकान विकास और विवाद के बीच खड़ी है। जहाँ प्रशासन इसे ‘सौगात’ के रूप में देख रहा है, वहीं जनता इसे ‘सामाजिक चुनौती’ मान रही है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए नियमों की पुनः समीक्षा करता है या राजस्व का यह मॉडल इसी स्थान पर संचालित रहता है।
