भानुप्रतापपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत बांसला में सामुदायिक भवन के ऊपर बने मकान को लेकर गुरुवार को पंचायत एवं प्रशासन की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। इस दौरान सामुदायिक भवन एवं उसके ऊपर बने मकान से सारा सामान बाहर निकलवाया गया तथा भवन में बनी सीढ़ी और सामने डाले गए शेड को जेसीबी मशीन से तोड़ दिया गया।
कार्रवाई के समय भानुप्रतापपुर तहसीलदार, ग्राम पंचायत बांसला के सरपंच, सचिव एवं पंचगण मौजूद रहे। पहले मकान को पूरी तरह खाली कराया गया, इसके बाद सीढ़ी तोड़कर टीम वापस लौट गई। इस कार्रवाई पर पीड़ित पक्ष ने गंभीर सवाल उठाते हुए इसे एकतरफा और द्वेषपूर्ण बताया है।
पंचायत का पक्ष
बांसला पंचायत से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम बांसला निवासी परमेश्वर चक्रधारी एवं उनके भाई यशवंत चक्रधारी को शासकीय सामुदायिक भवन एवं उसके ऊपर कथित रूप से किए गए अवैध निर्माण से अतिक्रमण हटाने के लिए पूर्व में नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के बावजूद भवन खाली नहीं किए जाने पर पंचायत ने शासन-प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।
पीड़ित पक्ष का दावा
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जिस भूमि पर निर्माण किया गया है, वह उनके कब्जे एवं पट्टे की जमीन है। उसी भूमि पर पहले पंचायत द्वारा शासकीय सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया था। बाद में पंचायत से विधिवत एनओसी जारी कर भवन के ऊपर अतिरिक्त निर्माण की अनुमति दी गई, जिसके बाद निर्माण कराया गया।
पीड़ितों का कहना है कि पंचायत में उनके द्वारा लिखित जवाब भी प्रस्तुत किया गया था, लेकिन प्रशासन ने उसे नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में अतिक्रमण था, तो उसे पूरी तरह क्यों नहीं हटाया गया? गुरुवार को पंचायत के सभी जनप्रतिनिधि एवं तहसीलदार मौके पर पहुंचे, ग्रामीणों की मदद से भवन को खाली कराया गया और केवल सीढ़ी तोड़कर कार्रवाई समाप्त कर दी गई, जिससे संदेह की स्थिति बनती है।
टेराकोटा प्रशिक्षण से जुड़ा मामला
परमेश्वर चक्रधारी ने बताया कि वे वर्षों से कुम्हार समाज को टेराकोटा शिल्प कला का प्रशिक्षण देते आ रहे हैं। उनके कार्य को देखते हुए वर्ष 2008-09 में प्रशासन द्वारा उनकी ही जमीन पर एक भवन का निर्माण कराया गया था। समय के साथ भवन जर्जर हो गया। मरम्मत की मांग करने पर पंचायत ने राशि के अभाव की बात कही, जिसके बाद परमेश्वर चक्रधारी एवं यशवंत चक्रधारी ने अपने खर्च से भवन की सुरक्षा के लिए ऊपर सिट लगाकर अतिरिक्त निर्माण कराया। इसके लिए वर्ष 2024 में पंचायत से विधिवत एनओसी भी प्राप्त की गई थी।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि सरपंच बदलने के बाद इस निर्माण पर आपत्ति जताई जाने लगी और इसे अतिक्रमण घोषित कर नोटिस जारी किया गया। लिखित जवाब पर विचार किए बिना 15 जनवरी को प्रशासन द्वारा भवन खाली कराकर सील कर दिया गया।
भ्रष्टाचार उजागर करने का बदला लेने का आरोप
पत्रकार यशवंत चक्रधारी ने आरोप लगाया कि कुछ माह पूर्व ग्रामीणों द्वारा पंचायत में हैंडपंप मरम्मत के नाम पर एक लाख इक्यासी हजार रुपये की अनियमित निकासी की शिकायत की गई थी, जबकि जमीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं हुआ। इस संबंध में खबर प्रकाशित होने के बाद सरपंच एवं उपसरपंच द्वारा गाली-गलौज, मारपीट और मकान तोड़ने की धमकी दी गई।
यशवंत चक्रधारी का कहना है कि उसी शिकायत और खबर का बदला लेने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई। उनके अनुसार मकान एवं भूमि से संबंधित सभी दस्तावेज उनके पास उपलब्ध हैं, जिन्हें ग्राम पंचायत, तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय एवं कलेक्टर कार्यालय में आवेदन के साथ संलग्न कर प्रस्तुत किया गया है, लेकिन अब तक उन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
पीड़ित पक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है।
