सर्व पिछड़ा वर्ग समाज का आर-पार का शंखनाद
छत्तीसगढ़ में ओबीसी समाज अब अपने अधिकारों और हक की लड़ाई के लिए सड़क से लेकर सदन तक आर-पार के मूड में आ गया है। छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज के बैनर तले आगामी 18 अक्टूबर (रविवार) को पूरे बस्तर संभाग सहित मोहला-मानपुर और सिहावा-नगरी क्षेत्र में एक बड़ा राजनीतिक दबाव बनाने की तैयारी कर ली गई है। समाज के लोग अपनी 3 सूत्रीय प्रमुख मांगों को लेकर सीधे क्षेत्र के विधायकों और सांसदों के द्वारों पर दस्तक देंगे और उन्हें ज्ञापन सौंपकर आगामी शीतकालीन सत्र में इन मुद्दों को लोकसभा और विधानसभा में पूरी ताकत से उठाने की चेतावनी देंगे।
क्या हैं छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज की 3 प्रमुख मांगें?
समाज की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि अब अधिकारों पर कोई समझौता नहीं होगा। ज्ञापन की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं, 27 प्रतिशत आरक्षण: युवाओं के भविष्य और रोजगार को सुरक्षित करने के लिए प्रदेश में ओबीसी वर्ग को पूरा 27% आरक्षण तुरंत लागू किया जाए। जातिगत जनगणना: राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी समाज के लिए एक अलग कॉलम जोड़ा जाए और देश में तत्काल जातिगत जनगणना कराई जाए।
पाँचवीं अनुसूची का विस्तार: बस्तर संभाग और अन्य संबंधित क्षेत्रों को पाँचवीं अनुसूची के दायरे में शामिल किया जाए।
कांकेर जिले में इन जनप्रतिनिधियों को सौंपा जाएगा ज्ञापन
कांकेर जिले के अंतर्गत आने वाले सभी विधानसभा क्षेत्रों और लोकसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को घेरने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। कांकेर विधानसभा: विधायक कार्यालय (ग्राम बेवर्ती) में विधायक आशा राम नेताम को ज्ञापन सौंपा जाएगा। भानुप्रतापपुर विधानसभा: भानुप्रतापपुर स्थित विधायक कार्यालय में विधायक सावित्री मांडवी को ज्ञापन दिया जाएगा। अंतागढ़ विधानसभा व कांकेर लोकसभा: अंतागढ़ के विधायक विक्रमदेव उसेंडी और कांकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद भोजराज नाग को भी प्रमुखता से मांग पत्र सौंपा जाएगा।
“आर-पार की लड़ाई का वक्त आ गया है, अब चुप नहीं बैठेंगे” — जिला अध्यक्ष मधेश्वर जैन
छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज के जिला अध्यक्ष मधेश्वर जैन ने समाज के तमाम युवाओं, माताओं, बुजुर्गों और प्रबुद्ध जनों से अपील की है कि वे बड़ी से बड़ी संख्या में अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में उपस्थित रहें। आज हमें अपनी एकजुटता दिखाने का दिन है। अगर आज हमने अपने हक की आवाज बुलंद नहीं की, तो आने वाले दिनों में हमारे बच्चे यूं ही बेरोजगार घूमते रहेंगे। हमें अपने बाल-बच्चों के भविष्य के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण चाहिए ही चाहिए। यदि जरूरत पड़ी, तो आर-पार की इस लड़ाई के लिए समाज के युवाओं को सड़कों पर उतरने और उग्र होने से भी पीछे नहीं हटना होगा। समाज ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इन जनप्रतिनिधियों ने आगामी शीतकालीन सत्र में लोकसभा और विधानसभा के पटल पर ओबीसी समाज की इन मांगों को प्रमुखता से नहीं उठाया, तो सरकार और प्रशासन को समाज के कड़े विरोध और उग्र आंदोलनों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।
चरणबद्ध आंदोलन और आगे की रूपरेखा
छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज इस बार किसी भी आधे-अधूरे आश्वासन के मूड में नहीं है। यह आंदोलन एक सुनियोजित और चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है। आंदोलन की शुरुआत कांकेर जिला मुख्यालय से हुई।
इसके बाद कोंडागांव जिला मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया गया। आगामी 31 अक्टूबर को सुकमा जिला मुख्यालय में एक विशाल प्रदर्शन की तारीख तय की गई है। सुकमा के इस प्रदर्शन के दौरान ही बस्तर संभाग के बाकी अन्य जिलों में भी आंदोलनों और तारीखों की घोषणा की जाएगी।
वर्तमान में पूरे देश में अधिकारों को लेकर सुगबुगाहट और आंदोलन का माहौल बना हुआ है। ऐसे में छत्तीसगढ़ का ओबीसी समाज युवा जाग चुका है। अब देखना यह होगा कि समाज की इस हुंकार और एकता के आगे क्षेत्रीय विधायक और सांसद शीतकालीन सत्र में कितनी मजबूती से उनकी आवाज उठाते हैं, या फिर बस्तर की धरती से उठा यह बिगुल एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष का रूप लेता है।
