लामकन्हार के लिए 85 लाख की घोषणा का स्वागत
लेकिन पूरे क्षेत्र के विकास की थी अपेक्षा
फसल नुकसान, सिंचाई, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और रोजगार के मुद्दों पर सरकार से स्पष्ट कार्ययोजना की मांग
अंतागढ़/दुर्गूकोंदल, 28 सितंबर 2026।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के रविवार को अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम लामकन्हार दौरे को लेकर क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों में विकास कार्यों तथा स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर बड़ी उम्मीदें थीं। विशेषकर लगातार बारिश से फसलों को हुए नुकसान, कृषि लागत, सिंचाई, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर मुख्यमंत्री से ठोस घोषणाओं की अपेक्षा की जा रही थी। मुख्यमंत्री के दौरे के बाद जनपद पंचायत दुर्गूकोंदल के उपाध्यक्ष आनंद तेता ने कहा कि क्षेत्र की जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप किसानों की तत्काल समस्याओं पर ठोस घोषणा नहीं हो सकी।
आनंद तेता ने कहा कि मुख्यमंत्री के दौरे में मुख्य रूप से ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि मुनगा पौधरोपण और पोषण के प्रति जागरूकता महत्वपूर्ण विषय है, लेकिन क्षेत्र के किसानों के सामने इस समय कई गंभीर और तात्कालिक समस्याएं हैं। इनमें बारिश एवं फसल नुकसान, बढ़ती कृषि लागत, सिंचाई की कमी, खराब सड़कें, बिजली की समस्या, कृषि उपज के लिए बाजार और स्थानीय स्तर पर रोजगार प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा कि जब किसी जिले या विकासखंड में मुख्यमंत्री का दौरा होता है तो ग्रामीणों को उम्मीद रहती है कि क्षेत्र के लिए बड़े विकास कार्यों की घोषणा होगी और लंबित समस्याओं के समाधान का रास्ता खुलेगा। लामकन्हार के लिए घोषित 85 लाख रुपये के विकास कार्यों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि अंतागढ़ और आसपास के व्यापक क्षेत्र के लोगों की अपेक्षाएं केवल एक गांव के विकास कार्यों तक सीमित नहीं थीं।
तेता ने कहा कि इस वर्ष लगातार बारिश के कारण किसानों को फसल क्षति का सामना करना पड़ा है। ऐसे समय में किसानों को सरकार से राहत, मुआवजा अथवा आगामी फसल के लिए सहायता की घोषणा की उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की प्रमुख समस्याओं पर स्पष्ट घोषणा नहीं होती और दौरे की चर्चा का प्रमुख विषय ‘हर घर मुनगा’ तक सीमित रह जाता है, तो ग्रामीणों में निराशा होना स्वाभाविक है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि अंतागढ़, दुर्गूकोंदल सहित पूरे कांकेर जिले में फसल नुकसान का वास्तविक आकलन कराया जाए तथा पात्र किसानों को नियमानुसार राहत एवं सहायता उपलब्ध कराई जाए। साथ ही सड़क, सिंचाई, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी मांगों पर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार कर उसे सार्वजनिक किया जाए।
